श्योपुर जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत संचालित स्वसहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक एवं सामाजिक बदलाव का माध्यम बन रहे हैं। कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा के मार्गदर्शन एवं सीईओ जिला पंचायत श्री कार्तिकेय जायसवाल के निर्देशन में स्वसहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं विभिन्न आजीविका मूलक गतिविधियों को अपनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं में बचत, ऋण एवं आर्थिक प्रबंधन की समझ विकसित होने के साथ ही परिवार के निर्णयों में उनकी भागीदारी भी बढ़ रही है।
ऐसी ही कहानी है ग्राम वीरपुर की निवासी श्रीमती पुष्पा वर्मा की, समूह से जुडने से पहले वह एक आम गृहणी थी, पति की आमदनी अधिक नही थी, इसलिए सात सदस्यों के परिवार का गुजर बसर मुश्किल हो रहा था।
उसकी कठिनाई को देखकर पडोस की एक दीदी ने उन्हें समूह से जुडने का प्रस्ताव दिया और वह साई बाबा स्वसहायता समूह से जुडकर 20 रूपये साप्ताहिक बचत करने लगी और समूह की साप्ताहिक बैठको में भाग लेने लगी। कुछ महीनो बाद समूह के माध्यम से श्रीमती पुष्पा वर्मा ने छोटा सा ऋण लिया और जनरल स्टोर का काम शुरू किया।
इससे उसे 200 रूपये प्रतिदिन की आमदनी होने लगी, धीरे-धीरे उसने समूह का लोन चुका दिया, इसके बाद जब समूह को डेढ लाख रूपये का सीसीएल मिला तो उसमें से उसने 80 हजार रूपये ऋण लेकर जनरल स्टोर की दुकान में मनीहारी का काम ओर बढा लिया, जिससे उसकी आमदनी भी धीरे-धीरे बढने लगी और अब वह 12 हजार रूपये प्रतिमाह औसतन कमाई कर रही है।
इस राशि में से वह प्रतिमाह 5 हजार रूपये लिये गये ऋण की किस्त भी चुका रही है और बच्चों को पढाने के साथ ही घर का खर्च चलाने में पति का सहयोग कर रही है। समूह से जुडने के बाद उसका पति भी अब ई-रिक्शा चलाने लगा है और उसने स्वयं अपने लिए एक स्कूटी भी खरीद ली है। रहने को पक्का मकान है।
इस प्रकार वे अब एक खुशहाल पारिवारिक जीवन व्यतीत कर रही है। श्री पुष्पा वर्मा कहती है कि 20 रूपये की बचत से शुरू हुआ यह सफर आज उसके लिए सुखद साबित हो रहा है। सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों का लाभ लेकर आज वे एक अच्छे मुकाम पर है और समाज में उनके परिवार का सम्मान भी बढ गया है।


