जबलपुर में 10 जुलाई 2025 को लगाए गए दहीमन के 90 पौधे साधारण रोपण की कतार भर नहीं हैं। TFRI ने इस जगह को “वानस्पतिक गुणन उद्यान” कहा है। यहां विकसित चुने हुए पौधों की टहनी या दूसरे जीवित भाग से आगे नई पौध तैयार करने का आधार बनना है।
एक पेड़ से कई प्रतिरूप
बीज से उगा हर पौधा आनुवंशिक रूप से थोड़ा अलग हो सकता है। वानस्पतिक गुणन में चुने पौधे की विशेषताएं उसी रूप में आगे ले जाने की संभावना रहती है। TFRI की सूचना के अनुसार इस उद्यान का लक्ष्य मध्य भारत के महत्वपूर्ण दहीमन का संरक्षण और प्रयोगशाला तकनीक से अधिक संख्या में पौधे तैयार करना है। परियोजना छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता मंडल से वित्तपोषित है।
उद्यान और प्रयोगशाला का जोड़
संस्थान के वृक्ष-सुधार प्रभाग के पास वानस्पतिक पौधशाला, ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला, आणविक जीवविज्ञान प्रयोगशाला और संकटग्रस्त प्रजातियों का पार्क दर्ज है। यही जोड़ महत्वपूर्ण है: मैदान का स्वस्थ स्रोत-पौधा प्रयोगशाला में गुणन का नमूना बन सकता है और तैयार पौध फिर बाहर जांची जा सकती है।
बुलेटिन ने परियोजना प्रमुख की ओर से पौध तैयार करने में आई चुनौतियों और सर्वेक्षण में वन विभाग के सहयोग की जरूरत भी दर्ज की है। इससे अभी इतना ही कहा जा सकता है कि संरक्षण का आधार बनाया गया है। कितने पौधे आगे सफलतापूर्वक तैयार हुए या कहां लगाए जाएंगे, उसका परिणाम इस सूचना में नहीं दिया गया।
मुख्य बातें
- 10 जुलाई 2025 को उद्यान में दहीमन के 90 पौधे लगाए गए।
- उद्देश्य आगे वानस्पतिक गुणन से बड़ी संख्या में पौधे तैयार करना है।
- TFRI के वृक्ष-सुधार प्रभाग में पौधशाला और ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला दोनों हैं।
स्रोत और संदर्भ
- ICFRE–उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर · दहीमन के वानस्पतिक गुणन उद्यान की स्थापना ↗10 जुलाई 2025
- ICFRE–उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर · आनुवंशिकी एवं वृक्ष सुधार प्रभाग ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- ICFRE–उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर · आनुवंशिकी एवं वृक्ष सुधार प्रभाग की सुविधाएं ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।



