राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती 02 अक्टूबर के अवसर की पूर्व बेला में पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय बड़वानी में प्रभारी प्राचार्य श्री कुंदन राठौर के मार्गदर्शन में गांधी जी के प्रमुख सिद्धांत ‘स्वदेशी अपनाओ, मिट्टी से जुड़ो’ के भाव को विद्यार्थियों के जीवन और गतिविधियों से जोड़ते हुए बैगलेस डे का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर ‘संजा माता पर्व की संस्कृति को कैसे आगे बढ़ाया जाए’ विषय पर केंद्रित विभिन्न रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मालवा-निमाड़ की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक कला तथा स्थानीय विरासत से परिचित कराना और उसके संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। इसी क्रम में कक्षा छठीं से आठवीं तक के विद्यार्थियों ने संजा लोक कला के निर्माण एवं सजावट में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
संजा मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ अंचल की विशिष्ट लोक एवं कलात्मक परंपरा है। लोकमान्यता के अनुसार संजा को माता पार्वती के स्वरूप से जोड़ा जाता है। इस परंपरा में बालिकाएँ दीवार पर गोबर से विभिन्न पारंपरिक आकृतियाँ बनाकर उनका श्रृंगार करती हैं तथा संजा के लोकगीत गाती हैं। विद्यालय में इस लोक परंपरा को रचनात्मक गतिविधि के रूप में प्रस्तुत किया गया।
बैगलेस डे के अंतर्गत आरोही, आयत, प्रियांशी एवं अन्वी ने संजा की पारंपरिक भित्ति सज्जा का निर्माण किया। उन्होंने पारंपरिक शैली से प्रेरित आकृतियों को फूलों, पत्तियों, रंगीन कागज तथा अन्य स्थानीय एवं सजावटी सामग्रियों से आकर्षक रूप प्रदान किया। विद्यार्थियों को संजा पर्व की पृष्ठभूमि, लोकमान्यता तथा मालवा-निमाड़ की संस्कृति में उसके महत्व की जानकारी भी दी गई। संजा निर्माण गतिविधि के साथ मालवी लोकगीतों का सामूहिक गायन भी हुआ।
तनिषा सोनाने एवं यशी सेंगर ने मालवी लोकगीत प्रस्तुत किए। बिना किसी वाद्ययंत्र के तालियों की थाप के साथ किए गए इस गायन ने कार्यक्रम में लोक संस्कृति की जीवंत छटा बिखेरी तथा विद्यार्थियों को स्थानीय लोकसंगीत एवं मौखिक परंपरा से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।
इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों ने मालवा-निमाड़ की संजा लोक कला को समझा, पारंपरिक आकृतियों एवं उनके सांस्कृतिक महत्व को जाना, स्थानीय एवं प्राकृतिक सामग्रियों के रचनात्मक उपयोग का अनुभव प्राप्त किया तथा मालवी लोकगीतों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को निकट से जाना। साथ ही उनमें सहयोग, सृजनात्मकता, कल्पनाशीलता और कलात्मक अभिव्यक्ति का विकास हुआ।
महात्मा गांधी जी के स्वदेशी और स्थानीय संसाधनों से जुड़ने के विचार को व्यवहार में उतारते हुए आयोजित यह गतिविधि विद्यार्थियों को अपनी मिट्टी, लोककला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का सार्थक माध्यम बनी। संजा निर्माण, सजावट और मालवी लोकगीत गायन के माध्यम से विद्यार्थियों ने स्थानीय परंपरा को जानने के साथ उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी को भी समझा।
पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय बड़वानी में आयोजित यह बैगलेस डे कला, संस्कृति और आनंदपूर्ण अधिगम का सुंदर उदाहरण रहा। गतिविधि मेंटर सुश्री महिमा सराफ के सहयोग, बैगलेस डे प्रभारी श्रीमती आकांक्षा सिंह के समन्वय तथा वरिष्ठ शिक्षिका श्रीमती आभा जैन के संचालन में कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने आयोजन को ज्ञानवर्धक, रचनात्मक एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाया।


