जिले के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने तथा उनके मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कमला नेहरू सामुदायिक भवन, बालाघाट में एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, बालाघाट द्वारा APEDA, भारत सरकार के सह-आयोजन एवं तकनीकी मार्गदर्शन में किया गया।

कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य जिले के ओडीओपी उत्पाद चिन्नौर चावल सहित विभिन्न किस्मों के चावल, गुड़, तिलहन, दलहन, श्रीअन्न (मिलेट्स), उद्यानिकी फसलें, मत्स्य एवं डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, क्वालिटी सर्टिफिकेशन तथा निर्यात के लिए आवश्यक लिंकेज को मजबूत करना रहा।

120 से अधिक कृषक एवं उद्यमी हुए शामिल

प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से 120 से अधिक कृषक, गुड़ उत्पादक, तेल उद्योग प्रतिनिधि, राइस मिलर्स, कृषि एवं युवा उद्यमी, कृषि सखी, बीआरसी संचालक, वर्मी कम्पोस्ट उत्पादक, शहद एवं मिलेट्स उत्पादक किसान तथा एफपीओ और महिला स्व-सहायता समूहों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में शामिल होकर संबंधित योजनाओं एवं गतिविधियों की जानकारी दी। वन विभाग, पशुपालन, मत्स्य, कुटीर एवं ग्रामोद्योग, उद्यानिकी, मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन, जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र, सेडमैप तथा नाबार्ड के अधिकारियों ने प्रतिभागियों को विभागीय योजनाओं एवं उपलब्ध अवसरों से अवगत कराया।

विशेषज्ञों ने दी निर्यात और मूल्य संवर्धन की जानकारी

उप संचालक कृषि फूलसिंह मालवीय ने कार्यक्रम की उद्देशिका बताते हुए ओडीओपी उत्पादों के चयन, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि उत्पादों के उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन तथा डीआरएस एवं बीआरसी जैसे विषयों पर जानकारी दी। APEDA भोपाल के क्षेत्रीय प्रबंधक निशांत बंसोड ने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में APEDA की भूमिका, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, क्वालिटी सर्टिफिकेशन तथा जैविक एवं प्राकृतिक उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं पर मार्गदर्शन दिया।

कृषि महाविद्यालय बालाघाट के कृषि वैज्ञानिक डॉ. उत्तम बिसेन ने चिन्नौर धान की उन्नत उत्पादन तकनीक, शोध कार्य तथा जीआई टैग से जुड़ी संभावनाओं की जानकारी देते हुए इसके वैश्विक बाजार में विस्तार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। प्रदान संस्था के तारीक सिद्दीकी ने ई-मार्केटिंग के माध्यम से उत्पादों के विपणन की जानकारी दी, जबकि सेडमैप के जिला समन्वयक सुनील ढोके ने प्रभावी विपणन रणनीतियों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया।

सुनीलदत्त खरगाल, जनपद पंचायत वारासिवनी अध्यक्ष श्रीमती माया उइके एवं डॉ. भीकम चौहान ने जैविक एवं शाश्वत उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। मंडी निरीक्षक मनोज पटले ने पीएमएफएमई योजना एवं कृषि अवसंरचना निधि योजना के माध्यम से कृषकों एवं उद्यमियों को मिलने वाले लाभों की जानकारी दी।

नाबार्ड के जिला प्रबंधक प्रकर्ष राउत तथा एसआरएलएम के कृषि प्रबंधक दिनेश कुमार ने भी संबंधित विभागीय योजनाओं एवं उनके लाभ लेने की प्रक्रिया से प्रतिभागियों को अवगत कराया।

पारंपरिक भटा-भात से दिखी स्थानीय संस्कृति की झलक

कार्यक्रम में स्थानीय कृषि उत्पादों के साथ जिले की खानपान परंपरा और संस्कृति को भी प्रोत्साहित किया गया। 'एक जिला-एक भोजन' (ODOC) पहल के अंतर्गत अतिथियों एवं प्रतिभागियों को पारंपरिक भटा-भात परोसा गया। इससे स्थानीय खाद्य परंपरा और कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में खुली परिचर्चा एवं प्रश्नोत्तरी सत्र आयोजित हुआ। इसमें कृषकों और उद्यमियों ने उत्पादों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग, प्रमाणन, विपणन एवं निर्यात से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा समाधान किया गया। अंत में उप संचालक कृषि फूलसिंह मालवीय ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम का समापन हुआ।